Description
श्रीमती शारदा मिश्रा के द्वारा (चेतन की कलम से) ‘प्रेम गणित’ का जो प्रणयन किया गया है, उसमें उन्होंने निष्कपट, निश्छल व निःस्वार्थ प्रेम को परिभाषित किया है, उक्त प्रेम को परिभाषित किया है, उक्त प्रेम साक्षात् परब्रह्म स्वरूप है, श्रीसीतारामस्वरूरूप, श्रीराधाकृष्णस्वरूप, श्रीलक्ष्मीनारायणस्वरूप, श्रीपार्वतीशिवस्वरूप आदि है, उक्त प्रेम को प्रेम गणित की प्रणेत्री ने यह स्वरूप इसलिए प्रदान किया है कि संसार में किसी से भी उक्त प्रेम के बिना प्रेम हो ही नहीं सकता है, प्रेम के बिना जीवन ही अपूर्ण है, अपूर्ण जीवन के द्वारा कुछ भी नहीं किया जा सकता है, लेखिका ने इतने तात्विक विषय को हृदयंगम करके इसलिये प्रेम गणित को प्रस्तुत किया है क्योंकि विद्या की अधिष्ठात्री देवी का एक नाम शारदा भी है, प्रणेत्री का नाम भी शारदा है, शारदा की कृपा के बिना विद्वत्ता की प्राप्ति असम्भव है, माता शारदा की श्रीमती शारदा मिश्रा पर पूर्ण कृपा है, वे एक गम्भीर विदुषी हैं, ‘यथा नाम तथा गुण: ‘ के अनुसार माता शारदा के यदि शत-प्रतिशत गुण नहीं है, तो बहुत ज्यादा कम भी नहीं है, इस ग्रन्थ के अध्ययन से निश्चित ही अध्येता प्रेम का तात्त्विक स्वरूप समझ सकेंगे। एवं तदनुसार उक्त प्रेम अपने जीवन में अपनाकर अपना सर्वतोभावेन कल्याण कर सकेंगे, श्रीमती शारदा मिश्रा से अपेक्षा करता हूँ कि उनकी लेखनी से जगत्कल्याणकारी ग्रन्थों का निरन्तर प्रणयन होता रहे, मैं उन्हें अन्तरात्मा से अनेकानेक ढेर सारा प्यार भरा आशीर्वाद प्रदान करता हूँ, इसी तरह से स्वस्थ एवं खुशहाल सानन्द सकुशल रहते हुए शतायु अवश्य ही रहें !

252 Vaishnavavas Part 3
Amrita Vani 









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