Description
श्री वृंदावन की भक्ति भावमयी भक्ति कही गयी है । इस भक्ति में अष्टायाम सेवा के भाव ही प्रधान हैं जिससे श्री प्रियालालजू की लीला का स्मरण कर भोग राग सेवा करी जाती है । श्री राधारमण गीता में रसिकवर श्री गुणमंजरी दास गोस्वामी जी के द्वारा रचित पदों में श्रीजी की उसी नित्य लीला तथा नैमित्तिक लीला का वर्णन है जिसके द्वारा उनके प्रिय भक्त उनकी उपासना करते हैं । रसिकश्रेष्ठ श्री सार्वभौम मधुसूधन गोस्वामी जी द्वारा वर्णित श्री राधारमण देव के प्राकट्य की अद्भुत कथा एवं दुर्लभ श्री राधारमण एवं श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी जी की स्तुतियाँ इस ग्रंथ को अद्वितीय बनाती हैं ।

Shri Radharaman Prakatya
A Shower of Divine Compassion
Aisvarya Kadambini
10 Leadership Sutras 


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