Description
माता यशोदा द्वारा श्रीकृष्ण बार अपनी दासी को कोई दूसरा कार्य करते देखकर यशोदा स्वयं दही समय वे श्रीकृष्ण की बाललीलाएँ गुनगुनाने और अपने विषय में सोच-सोचकर आनन्दितदही मथते समय साड़ी का सिरा दृढ़तापूर्वक था और जब वे दोनों हाथों परिश्रमपूर्वक रही थीं, उत्कट कारण उनके स्तनों जो दोनों परिश्रमपूर्वक मथने के कारण रहे दूध चूने लगा।

252 Vaishnavavas Part 3
Abduction for the happy ending 

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