Description
योग का पूर्ण अभ्यास करने का अर्थ क्या है ? क्या यह करना आज सम्भव है ? चलिए इस बात का पता लगाते हैं। विश्वविख्यात योगगुरु श्रील प्रभुपाद, योग के सही अर्थ को ढकने वाले व्यापारीकरण का पर्दाफाश करते हैं। वे यह सिखाते हैं कि, प्राचीन योगपद्धति केवल आसन और कसरतों के, तथा ध्यान व श्वासोच्छ्रास की तकनीकों के भी परे है और इसका लक्ष्य पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण के साथ प्रेममय शाश्वत मिलन है।

A Scond Chance
A Garland of Verses
Agni Mahapuranam(Set of 2 Volumes) 

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