Description
श्री परमानंद पाद द्वारा लिखित यह दिव्य लीला ग्रंथ जो नित्य एवं नैमित्तिक लीलाओं का आस्वादन कराता है, श्रीकृष्ण दास बाबा कुसुम सरोवर वालों के द्वारा प्रथम बार छापा गया था । जिसकी ४०० वर्ष पुरानी हस्त लिखित प्रतिलिपि उनके पास थी । वर्तमान में यह ग्रंथ प्रायः लुप्त ही हो चुका है । परंतु एक दिन जब दास ने इस ग्रंथ का अध्ययन किया तो हिंदी के अनुवाद में बहुत त्रुटियों को पाया । भावानुवाद वैष्णवाचार्य चन्दन गोस्वामी

An Illustrated Book For Kids- Six Goswamis Of Vrindavan 

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