Description
यद्यपि अनेक प्रकार की योगपद्धतियाँ उपस्थित हैं, फिर भी वैदिक साहित्य इस बात को स्पष्ट करता है, कि आप चाहे कोई भी पद्धति अपनाएँ, आपको सफलता केवल तभी मिलेगी, जब भक्ति विद्यमान रहेगी। भक्तियोग क्या है और किस प्रकार आप भक्तियोग को अपने जीवन में या अपनी वर्तमान योगप्रणाली में जोड़ सकते हैं? चूँकि किसी भी योगप्रणाली में या धर्मप्रणाली में केंद्रवर्ती भूमिका भक्ति की ही होती है, इसलिए भक्ति ही सर्वोत्तम योगपद्धति कहलाती है। भगवद्गीता में भगवान् कृष्ण अपने प्रिय मित्र अर्जुन को भक्तियोग की शिक्षा देते हैं और यहाँ पर श्रील प्रभुपाद उन्हीं संकल्पनाओं का विस्तार इस परिचयात्मक पुस्तक में करते हैं।

252 Vaishnavavas Part 3
Alankara Kaustubha
Aisvarya Kadambini 

There are no reviews yet.