Description
श्री ब्रह्म-संहिता काव्य का उद्गम प्राचीन काल से अज्ञात था । वैदिक परम्परा के अनुसार, ब्रह्म-संहिता के ये श्लोक इस ब्रह्माण्ड के प्रथम निर्मित जीव श्री ब्रह्मा ने, असंख्य युगों पूर्व, सृष्टिरचना प्रारम्भ करने से पहले गाये थे । श्री ब्रह्म-संहिता का प्रारम्भ पूर्ण पुरूषोत्तम भगवान् श्रीकृष्ण द्वारा श्री ब्रह्मा को दिए गये ज्ञान से होता है । उसके बाद श्री ब्रह्मा की असामान्य रूप से सुन्दर प्रार्थनाएं आती है, जो उन्होंने उनके साक्षात्कार के क्षण की थी, जिनमें भगवान् का धाम अर्थात् आध्यात्मिक जगत्, ब्रह्माण्ड का आविष्कार और भगवान् कृष्ण के तथा उनके पार्षदों के गुणों का वर्णन आता है । श्री ब्रह्म-संहिता के इस संस्करण का अनुवाद और टीका श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर ने लिखे है, जो श्रील प्रभुपाद (इस्कॉन के संस्थापकाचार्य) के “गुरू’ है ।

After the Disappearance of Sri Guru 

There are no reviews yet.