Description
भौतिकवाद के झुलसे हुए रेगिस्तान में, ‘आत्मा का प्रवास’ उच्चतर आध्यात्मिक जागरूकता के मरूद्यान का निश्चित रास्ता दिखलाता है। इन चित्ताकर्षक निबन्धों, प्रवचनों और अनौपचारिक वार्तालापों में, श्रील प्रभुपाद, जो बीसवीं शताब्दी के महानतम तत्त्वज्ञानियों में से एक हैं, प्रकट करते हैं कि, वैदिक साहित्य व उसकी मन्त्रध्यान की पद्धतियाँ हमें किस प्रकार, सभी व्यक्तिगत व सामाजिक संघर्षों को हल करके शाश्वत शान्ति व सुख की स्थिती तक आने में सहायता कर सकती हैं।

Alarnath
Agni Mahapuranam(Set of 2 Volumes) 

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