Description
यह “जीवन का स्त्रोत जीवन” पुस्तक आधुनिक विज्ञान और वैज्ञानिकों के अनुमानों और सिद्धान्तों पर की गई एक तत्क्षण एवं प्रतिभाशाली आलोचना है। विज्ञान का सदियों से यह ‘विचार रहा है और उसने इसी को बढ़ावा भी दिया है कि हमारे आसपास जो कुछ विद्यमान है, वो पदार्थ से बना है, और इन सारी नैसर्गिक-जैविक, भौतिक, मनोवैज्ञानिक तथा खगोलीय वस्तुओं को खण्डित किया जा सकता है। इन्हें भौतिक तथा रासायनिक नियमों के संदर्भ में इलेक्ट्रॉन्स व प्रोट्रॉन्स जैसे मूलभूत अणुओं के कार्यों के रूप में समझाया भी जा सकता है। यहाँ खास बात यह है कि बीसवीं सदी के महान तत्त्वज्ञानियों एवं •पण्डितों में से एक श्रील प्रभुपाद आधुनिक विज्ञान के उन दोनों ‘सिद्धान्तों जीवन की उत्पत्ति के सिद्धान्त और जैविक विविधता के सिद्धान्त ( विकासवाद का सिद्धान्त) का विश्लेषण करते हुए उनकी अस्पष्ट तथा निराधार मान्यताओं पर प्रकाश डालते हैं।

10 Leadership Sutras
ANIMALS IN KRISHNA CONSIOUSNESS 


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